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गुरुवार, 30 नवंबर 2017

परिणीता..........डॉ .इंदिरा गुप्ता

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सुख सुहाग 
माथे धरे 
गोरी हिय
सुख पाय 
प्रिय हाथ सिंदूर है 
ले सौगन्ध मांग
भरी जाय ! 

सुख सुहाग की
लाली 
प्रियतमा 
सदा सवारें रखना 
जीवन संगिनी 
जीवन पथ पर 
स्नेह भाव लिये 
संग चलना ! 

वचन बध्यता
रखेगे कायम 
मिल कर वचन
निभाये 
सिंदूर लालिमा 
जीवन पथ पर 
मिल कर हम
बिखराये ! 

एक युग्म 
हम दोनो होंगे 
सुख सौभाग्य
रचेंगे 
सुन अर्धांगिनी 
अपने जीवन को 
शुचि,  यश
गौरव से 
भर देगे ! 

डॉ .इंदिरा गुप्ता ✍

13 टिप्‍पणियां:

  1. वाह !!!
    बहुत सूंदर रचना
    जितनी ख़ूबसूरती से आप मन के भाव कागज पर लाती है
    पढ़ने वाले का मन खुश हो जाता है

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जर्रा नवाजी नीतू जी ..ऐसी प्रतिक्रियाये लेखन को और प्रवाह देती है आभार 🙏

      हटाएं
  2. अत्यंत सुन्दर भावनायें ! बधाई

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह मीता सुंदर सुंदर अतिसुन्दर।
    सात फेरे वचन और सिंदूर एक भारतीय विवाहिता के लिये पुरे जीवन का शाश्वत वरदान है सुख है त्याग है तपस्या है और है नव जीवन का आगाज।
    शुभ दिवस ।

    जवाब देंहटाएं
  4. सुख सौभाग्य रचेंगे .... उम्दा सृजन

    जवाब देंहटाएं
  5. मेरे साधरण काव्य को मान देने के लिये अति आभार 🙏

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत ही सुन्दर मनभावन प्रस्तुति....
    वाह!!!!

    जवाब देंहटाएं
  7. एक युग्म
    हम दोनो होंगे
    सुख सौभाग्य
    रचेंगे
    --- बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं

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